*** मेरे दिल ने कुछ कहा ***

*** मेरे दिल ने कुछ कहा ***
मैं ढूढ़ता हॅू जिसे वो जहॉ नही मिलता
मैं ढूढ़ता हॅू जिसे वो जहॉ नही मिलता
न जम़ी नया आसमां नही मिलता
न जम़ी नया आसमां मिल भी जाए
नए बशर का कहीं कुछ निशां नही मिलता।
वो तेग़ मिल गई जिससे हुआ है कत्‍ल मेरा,
किसी के हाथ का उस पर निशां नही मिलता,
वो मेरा गांव है, वो मेरे गांव के चूल्‍हे
कि जिसमे शोले तो शोले धुंआ नही मिलता
जो इक खुदा नही मिलता तो इतना मातम क्‍यू
यहा तो कोई मेरा हमज़बा नही मिलता
खडा हॅू कब से मैं चेहरों के एक जंगल में,
तुम्‍हारे चेहरे-सा कुछ भी यहां नही मिलता!!

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स्‍वप्‍न कला और आत्‍मा

स्‍वप्‍न एक अत्‍यंत ही मन मे होन वाली उथल-पुथल और पूरे दिन की थकान के बाद जब शरीर आराम करता है पूरे शरीर की ऊर्जा दिमांग मे संचित हो जाती है और अनंत गणनाये करने लगती है गणनाये इतनी सटिक एवं सही होती है जिससे दिमांग एक क्रिया का रूप धारण कर लेता है जिसे स्‍वप्‍न कहते है वास्‍तव मे जो कुछ घटना घटित होती है वह स्‍वप्‍न का रूप धारण कर लेती है स्‍वप्‍न सुख-दुख की सारी धटनाओ का समावेश करता है यह नही कि स्‍वप्‍न सुहावने या मजेदार होगें नही ये दर्दनाख, बेकार, एवं बुरे भी होते है जिससे मानव हसंता, रोता, या चलता है मनुष्‍य का दिमांग स्‍वप्‍न को जन्‍म देता है अब स्‍वप्न चल रहा होता है मानव को ऐसा प्रतीत होता है कि यह बिल्‍कुल सच मे हो रहा है पर होता नही है वह स्‍वप्‍न टूटते ही वास्तिविकता के दर्शन कर लेता है स्‍वप्‍न अनगिनत तरह के होते है और मानव के समान अन्‍य जीव भी स्‍वप्‍न का आनंद लेते है।
अब खास बात यह है कि स्‍वप्‍न के दौरान आत्‍मा कहा होती होगी मुझे तो लगता है जब तक स्‍वप्‍न चल रहा होता है आत्‍मा का कुछ अंश यात्रा भ्रमण के लिए निकल जाता होगा और ज्‍यो ही घटनाये घटी है उनके दर्शन कराती रहती होगी और ज्‍यो ही हम धबरा कर उठ जाते है अंश आत्‍मा स्‍वमेव ही शरीर मे प्रवेश कर जाती होगी। हा यह बात ध्‍यान आकर्षित करने योग्‍य है कि जब कोई स्‍वप्‍न देख रहा होता है तो मष्तिष्‍क शून्‍य अवस्‍था मे चला जाता है और पूर्व शांति का अनुभव महसूस करता है इस दशा मे दिमांग भी सुकून महसूस कर रहा होता है चह हो सकता है कि स्‍वप्‍न और आत्‍मा एक दूसरे के पूरक है।

****स्‍कूल के समय देर से कक्षा मे प्रस्‍तुत या उपि‍स्थित होना ****

img_20170127_111421आस के समय मे विघार्थी कक्षा मे देरी से जाना पसंद करते है । उनका  यह देरी से जाने का कारण स्‍वंय शिक्षक भी आज तक समक्ष नही पाये है । वे इस बात से अंजान रहते है । यह विघार्थी देरी से क्‍यो आया उसका सही कारण वे जाने बिना वजह उन पर अत्‍याचार या सजा देने के लिए तत्‍पर रहते है। यह तो हुई एक वजह पर और भी वजह हो सकती है जैसे कि छात्र स्‍वंय देर से जाना चाहाता है । वह किसी भी प्रारंभिक कार्यकलाप मे बिल्‍कुल भी अपनी उपस्थिति दर्ज नही कराना चाहता है। इस आधुनिकीकरण के समय    मे उनका ध्‍यान टेलिविजन इंटरनेट एवं अन्‍य आधुनिक साधनों पर टिका हुआ है । वे स्‍कुली झंंझट मे कम ही पड़ना चाहते है। आई शिक्षा की बात तो वह इंटरनेट या कोचिंग के माध्‍यम से प्राप्‍त करने की कोशिश करते है। और शायद कुछ एक सफल भी हो जाते है । पर इस विषय मे स्‍कुली प्रशासन को जरूर सोचना चाहिए ।

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invisible machine

how to make?

  1. 14 वी शताब्‍दी की पवन चक्‍की ।
  2. एक बहुत बडा गोल ड्रम।
  3. बहुत से छोटे पंखे।
  4. Power full inverter.
  5. Analog watch.  ii. Digital timer iii. 10 digits.
  6. चांदी ओर सोने से बनी छडिया जो इस घेरे को पूरी तरह ढ़क दे, ये छडी तब घूमेगी जब बड़ा ड्रम घूमेगा उसकी विपरीत दिशा मे।
  7. वातावरण/जैसा पूरी दुनिया मे होगा।
  8. एक कांच का घर।
  9. कुछ ऐसा जो परमाणु की शक्ति के बराबर या सहनशील हो।
  10. Power full super computer जो इन सब की निगरानी करें किसी फिल्‍म की तरह ex:- Jems bond.
  11. टेलीफोन यंत्र new version.
  12. कार्डियोग्राम जिसका subject की सही जानकारी हो जैसे कि जीवित हो या मृत हो ऐसा ही कुछ समझों।IMG_20150723_161115.jpg

\\ दो प्रेमी का पुर्नजन्‍म \\

\\ दो प्रेमी का पुर्नजन्म \\
एक शहर था जिसका नाम विस्साधर था उस गांव मे एक लडका रहता था उसका नाम मुकेश था वह सभी के साथ हिल-मिलकर रहता था एक दिन वह अपने शहर मे घूम रहा था तभी उसके मित्र भी आ गये ओर पहाडी पर चलने को कहने लगे जब वे जा रहे थे तो उनके साथ एक ओर नया व्यक्ति आ गया पर वह उसे नही जानते थे अनजान होते हुए भी वह उनसे घुल-मिल गया था सभी पहाडी पर चढ कर बैठ गये वह लडका जो रास्ते मे मिला था कुछ बहकी-बहकी बाते कर रहा था वह कह रहा था इस पहाडी पर कुछ साल पहले दो लोग मिलते थे एक लडकी व एक लडका दोनेा एक दूसरे से प्रेम करते थे मुकेश ने उनका नाम पूछा कि कौन थे वे – वह अनजान युवक ने नाम नही बताया ओर युवक आने लगा मुकेश उससे कहने लगा कि रूको दोस्त कुछ तो बताओ पर युवक चलता रहा ओर चलते-चलते हवा मे उडने लगा यह देखकर मुकेश के दोस्त भाग गये — अब दोनो हवा मे उडते-उडते जा रहे थे एक जंगल के पास जाकर दोनो नीचे आ गये ओर कहा तुम ही हो जिसे मे यह सब दिखाना चाहता था मे ही हॅू जो इस पहाडी पर अपने प्रियतम से मिलता था पर शहर वालो को यह सब बिल्कुल अच्छाे नही लगा ओर उन्हो ने दोनो को जान से मारने की धमकी दी। पर दोनो भाग गये ओर इस पहाडी पर रहने लगे। उन्हेर मारने के इरादे से रात को सब पहाडी पर पहुच गये ओर उनके घर मे आग लगा दी दोनो बाहर निकले तो उन्हेो पकडकर पहाडी से नीचे फेंक दिया। जिसमे मेरी मृत्यु हो गई पर मेरी सखी नही मरी थी उसे दूसरे गांव वाले उठाकर ले गये उसे नागपुर की तरु किसी गांव मे रखे थे वह अभी ठीक है पर उसे कोमा से नही बचा पाये वह अभी भी कोमा मे है। ओर मेरा इंतजार कर रही है पर मै नही जा सकता पर तुम मेरे जैसे दिखते हो तुम चले जाओ ऐसा बोला ओर वह मुकेश मे समा गया अब वह युवक मुकेश था जो शक्ति का अनुभव कर रहा था। पर वापस घर आया ओर अपने मित्रों को यह सब बताया। बात सुनकर सबको डर लगने लगा पर मुकेश ने समझाया कुछ नही होगा । हम नागपुर जायेगे। बोला कि सब तैयार हो जाओ, सुबह चलेंगे सब मित्र सुबह तैयार होकर नागपुर वाली बस से नागपुर जाने लगे।
जाते-जाते सभी आगे क्या होगा इस बात को सोच रहे थे। कि अब क्या होगा फिर होना क्या था बस चलने लगी, मुकेश का एक ओर मित्र मिला जो बस मे था पर मुकेश नही पहचान सका वह तो उस युवक को जानता था जो उसके अंदर है। उसने मुकेश से कहा भी पर वह नही बोला— एक दिन के बाद बस एक जंगल के पास से जा रही थी साम का समय था । मुकेश को कुछ एहसास हुआ ओर जल्दीन से उसने बस को रूकवाया ओर जल्दी से नीचे उतर गया केवल वह अकेला उतरा फिर बस चल दी मुकेश नीचे उतर गया तथा रेाड पर चलने लगा। धना जंगल था पर वह चलता गया आगे चलते-चलते मुकेश एक खंडहर के पास पहुच गया बाहर तो बेकार दिख रहा था पर जब मुकेश अंदर गया तो अंदर नया सा हो गया वह दरवाजे खोलकर अंदर जाने लगा उसने तीन दरवाजे तो दिख रहे थे पर वहा कोई नही दिख रहा था फिर मुकेश ने चौथा दरवाजा खोला वहा पर भी कोई नही था अब उसे डर लगा कि कोई नही है यहा पर इस लिए वापस जाने लगा वापस लेकिन दरवाजे बंद हो गये पहला दूसरा, तीसरा सभी पर मुकेश खोलने की कोशिश करता रहा ओर सफल भी हो गया आखिरी दरवाजा के दो दरवाजे बरन गये एक खुल गया पर दूसरा नही खुल पाया — मुकेश खोलने लगा पीछे से चमकादड आई ओर टकराकर उडने लगी अंदर से मुकेश को कोई पुकार रही थी कि —— तुम अभी-अभी आये हो ओर वापस जाने लगे मुझसे मिले बिना आओ मेरे पास, जरा देखो तो मै कौन हू, पर मुकेश पूरी तरह से डर गया ओर थर-थर कांपने लगा जैसे ही वह सामने आई तो उस युवक की आत्मा निकलकर मुकेश से अलग हो गई ओर बोला कि तुम अब चले जाओ वह बोला – तो दरवाजे अपने आप खुल गये ओर मुकेश बाहर चला गया अब दोनो युवक युवती मिल गये थे, हॉ वह युवती की आत्मा थी वह भी मर चुकी थी पर दोनो मुक्त नही हुए थे वह दोनो एक जादुई खंडर मे कैद हो गये थे वहा एक जादुगर ने जादू से खंडर बनाया था जो भी जीवित प्राणी वहा जाता था ओर चला गया पर आत्मा वही कैद हो जाती थी । अब दोनो उसी खंडर मे रहने लगे करीबन सन 2026 दिसंबर 31 के दिन वहा पर एक भूतिया फिल्म की सूटिंग करने मुंबई से टीम आई थी फिर क्या हुआ होगा ?????

To be continune……..

चुडैल और भूत कीखोज

चुडैल ओर भूत की खोज

पुराने समय की मान्‍यताऐ किसी भी इंजान के दिल व दिमांग मे अंदर तक भेद करती है कि क्‍या घटनाये है उनके बीच तथ्‍य क्‍या हो सकते है इस बात को सामान्‍य इंसान यह कहकर इंकार कर देता है कि इसमे कि कार्य या विचार विमर्श मान्‍य होगा या नही पर तपस्‍वी या बीर पुरूष जहां भयभीत इंसान इस बारे मे सत्‍य विचार कर सकता है यह विचार जन ओर अन्‍य वास्‍तविक महान पुरूषो की ओर इसारा करा है इस जीवनकाल  को खोजता रहता है चाहे उसमे उसे लाभ की अभिलाषा बिल्‍कुल भी नही लगती वे तो इसे अपने कार्य का वह प्रतिफल जो उन्‍हे प्राप्‍त होने वाला रहता है वह पुण्‍य ही है या तो सत्‍य कर्म जो सत्‍य पुरूषो के द्वारा तैयार किया हुआ होता है पर हर व्‍यक्ति यह कभ्‍ाी   नही सोच सकता कि वह प्रक्रति से भी महान है कितना शक्तिशाली है अपने कर्म का कार्यकलाप एक तो स्‍वंय करता है दूसरा किसी ऐसे इंसान से उसकी भलमनसी की जानकारी का प्रारूप प्राप्‍त करना ही उसका लक्ष्‍य मात्र होता है सिदघ पुरूष विघमान तथ्‍य या लक्ष्‍यो को कदापि प्राप्‍त करने की कभी कल्‍पना भी नही कर सकते अरे हॉ अब याद आया कि हम किसी ऐसे तथ्‍य या संस्‍मरण के बारे मे बाते करने वाले है यह तर्क इसलिए दिया कि कोई यह न समझे कि किताबो का अध्‍ययन कर इतिहास संविदा ओर इसके बारे मे जानकारी श्रोता को प्रेषित  की जा रही है ज्ञांतव्‍य है कि भूत, पिशाच, चुडैल ओर अद्रश्‍य शक्तियां धरा मे विदयमान है योगी ओर भोगी यह सब जानकारी रखते है पर फिर भी इस विषय मे थोडी बहुत ज्ञान मानव मे तो अवश्‍य होना ही चाहिए  कि क्‍या, ये वास्‍तव मे सत्‍य हो सकता है मुझे यह बताते हुए थोडा सा आश्‍चर्य यह हुआ कि मै भी इस मुर्खता भरी बातो मे आ गया ओर इस विचार रूपी तथ्‍य की खोज के लिए दिनांक 17-10-2016 की रात को दो मेरे भान्‍जो के साथ निकल गया किसी ऐसी रहा पर जहां यह जानकारी मिल जाये कि वास्‍तव मे जीवित अदृश्‍य आत्‍मा या शरीर उस सूनसान स्‍थान मिल जाये तो सत्‍यता प्रकट हो जाये पर ऐसा हुआ नही वह तो उस भयानक स्‍थान पर जाकर ही पता चलने वाला था फिर क्‍या हम करीबन 12 बजे उस स्‍थान पर चले गये ओर खोज शुरू कर दी उस दिव्‍य पदार्थ रूपी मानव अंश की करीबन 1 धंटा तक उस जगह का भ्रमण किये हम तीनो ने पर तनिक भी निष्‍कर्ष नही निकल सका मेरी जानकारी के अनुसार वहा पर कुद न कुछ तो अवश्‍य होना ही चाहिए था । पर जानकारी अपर्याप्‍त ही सिदघ हुई ।

मै, ओर मेरे दो भांंजे सहित हम खोज करने को गये थे    भरता देव ।।

एकाग्रता

कार्य करने की एकाग्रता उसकी सूक्षमता को प्रदर्शित करते है किसी कार्य को लगनशीलता से करने पर उस कार्य की खूबसूरती अत्‍यधिक बढ जाती है कार्य की रूचि बढने लगती है कार्य सरल हो जात है विभिन्‍न स्‍वरूपो को अपने अन्‍दर अवशोशित कर नये-नये  रंगो तथ्‍यो मे विभाजित हो जाता है, कोई व्‍य‍िक्‍त किसी कार्य मे अपनी रूची दिखाता हे तो कोई किसी अनय कार्य मे सामान्‍यत: समाज दर्शित करता है कि किसान खेती बिचौलियों विक्रय ओर नेता राजनीति ओर भी विभिन्‍न कार्य कलाप मनुष्‍य द्वारा किये जाते है सोचने के बात य है कि इन्‍हे अपने अपने काम मे निपुणता कौन  प्रदान करता है  क्‍या ये उनका पैतृक कार्य होता है या किसी लक्ष्‍य को हासिल करने के कार्य किया जाता है कहने कही बात यह है कि प्रत्‍येक लगनशील मानव को जो कार्य करने के आगे बढता है तथा उस कार्य को पूर्ण करता है वह वास्तिवकता को उजागर करता है ।

कार्य करना ओर लक्ष्‍य पाना मनुष्‍य को रोजमर्रा का कार्य है यही नही प्रतिदिन कार्य करने की एकाग्रता बढने जा रही है मानव अब यंत्री, मशीन का उपयोग भी कार्य करने के लिए करता है।

चींटी

*** मेरी प्‍यारी सी चींटी ***
एक चींटी धीरे-धीरे अपने खाने की आवश्‍यक सामाग्री जुटा रही है, इतनी छोटी सी है वो मगर उसका दिमांग इंसानों से भी बडा है इसलिए चींटी मनुष्‍य से ज्‍यादा दिमाग वाली है और हॉ बजन भी अपने से तीन चार गुना उठाकर ले जाती है और दिन भर की मेहनत करके चींटी अपने छोटे से घर मे खाना इक‍टटा कर रही है। पर हम इंसान होेते हुए भी यह समझ ही नही पा रहे है कि बिना मेहनत के कोई भी वस्‍तु प्राप्‍त नही कि जा सकती…………….*umee*

साईबर लॉ

इंटरनेट ओर ई-कामर्स के बढते कदम बाजार को देखते हुए मै साईबर लॉ मे स्‍पेशलाईजेशन करने मे इच्‍छुक हॅू भारत मे इसका स्‍कोप है –

इंटरनेट ने सभी सीमाओं को तोडकर पूरी दुनिया के कटप्‍यूटर   नेटवर्क को जोडा है यह आई टी से संबंधित व्‍यक्ति को बहुत अच्‍छा लगता है लेकिन एक वकील होने के रूप मे बहुत ही झंझट भरा होता  है पहले कानूनी पेच थे कि यह विशेष ट्रांजेक्‍शन कहा से हुआ व किस देश से हुआ है अत ये सब कुछ भयावह  हो गया है अत डोमेननेम, कॉपीराइटर ओर पेमेन्‍ट जैसे इंटरनेट प्रापर्टी साइबर कानून एक तरह सूचना हाईवे के लिए ट्राफिक नियम है जो सिविल और क्रिमिनल कानून द्वारा निर्धारित होते है दुनिया के करीब 51 देशाे ने एक कानूनी संघी ; हैग कंवेशन ऑन ज्‍यूरीडिक्‍शन एंंड फौरेन जजमेन्‍ट बनाई है ताकी सीमा के आर-पार हुए झगडो को शांति पूर्ण  सुलझाया जा सके भारत एशिया का दूसरा और दुनिया का बारहवा  ऐसा है जिसमे एक अलग  इंफॉमेशन एक्‍ट बना है जैसे जैसे इंटरनेट द्वारा व्‍यापार बढ रहा है बैसे बैसे झगडे भी बढ रहे है इसलिए इंटलेक्‍चुअल प्रापर्टी राइटर्स जिसमे पेटेंट ट्रेडमेनी कॉपीराइट और डिजाईन भी शामिल हेै कि जरूरत पडेगी आप किसी बडी लॉ फर्म मे जुनियर प्रेक्टिशनर या असिस्‍टेंट के रूप मे कार्य कर सकते है या फिर बडी लॉ  फर्म के किसी शोध मे सहायक बन कर अपना भविष्‍य उज्‍ज्‍वल कर सकते है साईबर लॉ मे वर्तमान मे अपराध अनगिनत बढते जा रहे है बहुत से लोगो इसकी गिरफत मे किसी ओर कुछ एक प्रतिशत यूजर यह जानते है कि यह किसी न किसी तरह अपराध कारित हो रहा है फिर भी हैकिंग करते है यहा –अपराधी भ्‍ाी अनंत है ओर अपराध भी ।–

***-एक अपराधी की तरह  -***

**umee**

 

 

** उमरेठ मे है एक गुप्‍त द्वार **

आज दिनांक 26-12-2016 के दिन मै ओर मेरे दो दोस्‍त छिंदवाडा जिले की एक तहसील उमरेठ है वहा जाते समय हम एक जगह से गुजरे तभी मित्र हरिकिशोर  ने बताया की उस ग्राम मे एक पुराने समय का कुंआ है   मेेरी इच्‍छा हुई की उस कुए को क्‍यो न देखा जाये ओर उसके साथ देखने वहा चला जा रहा था रास्‍ते मे  बच्‍चो से पूछा कि बच्‍चो वह कुआ कह है जिसके  नीचे बहुत साारे कमरे  है उन्‍होने बताया कि वह ग्रा्म के नजदीक है हम धीरे-2 उस कुए के बहुत नजदीक चले गय बहार से देखदर चला गया अंदर ने पर वह कुंआ कचरा धर के समान लग रहा थाा फिर भी मै उस कुए मे उतर गया ओर देखने लगा कि खास बात क्‍या है उस के सामने एक दरवाजा था जिसमे पूर्व की ओर दो दरवाजे थे मै सामने वाले दरवाजे से अंदर जाकर देखा तो दो दरवाजा ओर दिखाई दिया जिस दरवाजे मे से आगे गया था उसके सामने एक ओर दरवाजा था बाजु मे से रोशनी  आ रही थी मै उसी तरफ चला गया ओर आगे जाकर देखा तो सामने एक ओर कुआ था वह बहुत ही गहरा रहा होगा स पर मिटटी भरी पडी थी कहा जाता है कि उस कुए की गहराई मे एक बडा गुप्‍त दरवाजा हे जिसमे से बैल गाडी हाथी ओर कई लोग एक साथ जा सकते है यह द्वार नागपुर तक पहुचता है वहा के लोगो ओर मित्रो के कथन अनुसार ये अंग्रजो के समय निर्मीत हुआ कुआ था जो उनसे बचने के लिए छुपने का रास्‍ता था ओर सेना नागपुर से उमरेठ जाने का रास्‍ता था फिलहाल मे ये रास्‍ता अभी मिटटी के ढह जाने से बंद हो गया है हा अब आते है कंए के पास एक छोटी सी गली रूपी जगह है वहा नागपुर कि तरफ जाती हुई दिखाई दे रही थी उस तरफ से चमगादड निकल रहे थे तो उस तरफ मै नही गया उसकी दूसरी तरफ दीवार दिख रही थी वह भी पक्‍की इटो से बनी है इसके बाद मे धीरे से जो द्वार पहले देखा था उसकी तरफ गया जो बाहर जाने का रास्‍ता इंगित करता है पर मै उस तरफ से नही गया वापस जिस  रास्‍ते से गया था उसी रास्‍ते से वापस आ गया वैसे तो उस स्‍थान पर लोगो का जाना मना है वह कुछ ओर भी तथ्‍य प्राप्‍त होने के आसार है हा ऐसा हाेे सकता है कि अंग्रेजो के युद्व की वजह से वहा के ग्रामीण जनों ने अपनी जमा पूजी को उस कुए के गुप्‍त द्वार पर छिपा दिया होगा ओर फिर स्‍वतंत्रता प्राप्ति तक सब भूल गयेे होगेे या जो जीवीत रहे भी होगे तो वे अत्‍यंत ही बुजुर्ग हो गये होंगे ओर वहा किसी को नही जाने देना चाहते होंगे पुुरानी सोच के अनुसार वह धन किसी के हाथ नही लगना चाहिए ऐसा वहा के ग्रामीण की सोच हो सकता है वहा दोबार जाने की तमनना लिए हम वापस छिंदवाडा के लिए निकल गये हा साम का समय था ठण्‍ड भी लग रही थी अब हम वहा से चल दिए और सीधे छिंदवाडा आकर ही दम लिया **************