**कुछ ऐसा होगा 2017 का अंत**

 

**कुछ   ऐसा होगा 2017 का अंत**

  • जिन्दगी या तो भरोसे से बडा हो सकता है । या प्‍यार के अहसास से 2 कठिनता जिन्‍दगी का 1 नाम है दूसरा ये तो कोई सदावहार इंसान ही कह सकता है । नैतिकता और मानवता दोनो से परे है कोई इसमे समझौता कभी भी नही कर सकता है ।
  • इन सारी तकनीनिकियो और विज्ञान का कहर किसी भी इंसान कि जिन्‍दगी बदल सकता या उसे और बेहतर कर सकता है । क्‍योकि मानवीय क्रियाकलाप भी उनकी शक्तिया सजीवों को निष्‍क्रीय या यूं कूहूं कि उन्‍हे हमेशा के लिये मार सकती है ।
  • जो मानव यह सब आसानी से कह सके तो दुनिया का निर्माण या अंत मे सहायक होने के लिए केवल कारीगर का कार्य कर सकता है । केवल वही-
  • सत्‍य दशों से भिन्‍न या अन्‍यों से अनेक हो सकता है पर विश्‍वास या तकनीक दोनो से भिन्‍न हो सकते  मे केवल अपने आपमे नही  वरन सर्वकालिक लोको मे विदयमान जीवों के बारें मे सत्‍यता कह रहा क्‍योकि 1.25% ब्रम्‍हाण को ही मानव जान पाया है ।
  • बाकी 98.75% से दो गुना दुनिया विस्‍तारित परन्‍तु इसे महानता के महानतम खोजकर्ता या वैज्ञानिक की नही जान पाये । पर जानने की कोशिश मे हॅू।

जाने कि कोई भी अनजान ग्रह समाप्‍त हो रहा है पर इसकी जानकारी अद्रश्‍य या द्रश्‍य युवक या यॅू कहों कि एलियन भी नही जान पाये वे आते है कि पृथ्‍वी का विनाश लोगो पर किन परस्थितियों मे ?  वे जानकारी  जुटा रहे है पर नियम “Nutro-pelagone”  के बारे मे वे या मानव भी नही जान पाया है पर मै आज उसे अपने इस लिखित बयान मे कह रहा हॅू कि यदि कोई भी आपदा या कुछ भयानक हुआ तो इस Netro-pelagone की खोज करे यदि मानवता की जानकारी बचानी हो तो बरना ब्रम्‍हाण के साथ पृथ्‍वी एक छोटे धमाके से नष्‍ट हो जायेगा ये सब जो है उस नियम  पर आधारित है जिस पर मै अपने ही बनाये नियम को गलत होने की कामना करता हॅू भविष्‍य मे पृथ्‍वी 27 छेद होंगे जो कि HLC से भी बडे होगे जिससे पृथ्‍वी अनियंत्रित हो जायेगे ओर ब्रम्‍हाणों मे बिलीन घूम जायेगी । पर मानवों मे कुछ जीवित होगे जिन्‍हेइसकी जानकारी नही फिर भी उस 27 छेदो को भरने के लिए  लावा और प्‍लास्टिक का उपयोग करेंगे तब जाकर पृथ्‍वी नियंत्रण मे होगी पर पृथ्‍वी 2.3 प्रतिशत ही मानव जीवन जी  रहे है या जीवन पा रहे होंगे।

Advertisements

The thief

date 25/06/2017 time 5:30 pm

आज से पाच साल पहले कि बात है एक गांव मे दो चोर रहते थे दोनो चोरी करने मे माहिर थे ओर जो भी दोनो चुरा कर लाते थे उसे दोनो ही बराबर भागो मे बाट लिया करते ऐसे ही उनका दिन बीतते चले जा रहे थे एक दिन आया जब उस गांव मे महामारी फेल गई सब तरफ हाहाकार होने लगा लोग मरने लगे किसी को किसी की परवाह ही नही थी अपने परिजनो के साथ इधर से उधर भाग रहे थे सब अपनी जान बचाने के लिए कोई उपाय खोज रहे थे पर उनको कोई उपाय समझ मे नही आ रहा था तब गांव के मुखिया कुछ सोच कर कहा कि उन दोनेा चोरो को ले आओ ओर जो भी समय तक उन लोगो ने हमारे गांव की चोरी की है अब उन्‍हे तो गांव का कर्ज चुकाने का समय आ गया है ओर दोनेा को यह समझा दो कि अगर भाग कर गये तो उनका भला कभी नही होगा ओर वे कभी सुखी भी नही रहे पायेगे ऐसा कहकर गांव के मुखिया ने उनको बुलवा लाया दोनेा चोर आ गये ओर काम करने को तैयार हो गये पर उन्‍होने धन की मांग की मुखिया ने उन्‍हे धन दे दिया ओर वे उस गांव से चले गये ओर करीबन 1 सप्‍ताह के बाद वापस आये ओर कहा कि हमे एक विद्धान मिले थे जिन्‍होने कहा कि उनके गांव की महामारी पाप करने ओर लोगो के साफ सफाई न रखने की वजह से हुई है तो यह तबाही हो रही है । पर मुखिया ने कहा कि अगर ये बात है तो हम आगे से ध्‍यान रखेगे ओर साफ सफाई मे ध्‍यान देंगे पर फिलहाल कोई उपाय तो होगा कि इस महामारी से निपटने का कुछ तो बताया होगा उस विद्धान महोदय ने जरा चोरो साफ साफ बताओ कि क्‍या बात है जो उन महात्‍मा जी ने तुम्‍हे बताया उन्‍होने कहा कि अब इस गांव मे बडा हवन होना चाहिए ओर महाभंडारा होना चाहिए जिससे पाप कम हो जाये ओर बीमारी भी खत्‍म हो जाये सब के सब तैयार हो गये ओर हवन ओर भंडारे का सामान जुटाने लगे पर फिर भी समस्‍या आ रही थी कि हवन कौन करेगा फिर चौरो से पूछा गया कि क्‍या तुम उसी महात्‍मा को हवन करने क्‍यो नही बुलाते तब चौरो ने कहा कि ठीक है हम उन्‍हे आने को कह देंगे लेकिन वे इस काम के लिए धन मांग सकते है तब सभी गाव वालो ने उन्‍हे धन देने की हामी भर दी ओर फिर क्‍या था कुछ ही दिनो बाद उस गांव मे हवन का कार्यक्रम रखा गया पर कोई भी महात्‍मा नही आये ओर फिर उन चोरो के द्वारा ही हवन सम्‍पन्‍न किया गया पर इस बार चोरो ने धन नही लिया फिर से गांव हरा भरा हो गया ओर महामारी समाप्‍त हो गई ।।

1 इस कहानी से आपको क्‍या प्रेरणा मिलती है?

।।स्‍वभाव दिल और दिमाग दोनो पर वार करता है।।

जिन्‍दगी ने तुम्‍हे इतना कुछ दिया ओर तुम्‍हे ये लगता है कि तुम केवल मुझे पाने के लिए हो या फिर मानवीय लोथडे को पाने की निरंतर कोशिश कर रहे हो तुममे घमंड पूरी तरह हावी हो गया है प्‍लीज ध्‍यान दीजिए कोई भी बात गलत नही होगी। मै केवल तुम्‍हारा भला चाहती हॅू। तुम केवल भविष्‍य मे चलो पुरानी बाते स्‍वप्‍न समझकर भूलो प्‍लीज 00

## only three likes ##

88 Only three likes 88

saturday 12:30 27/05/2017

 

|| जिंदगी एक सामान्य सी चलने वाली घड़ी है इस घड़ी मे जाने कितनी ही सुईया होगी पर मेरे इस दोहरे जीवन मे केवल तीन ही कड़िया है जीजश की एक शर्त थी uske liye   की वह अपनी

GF को पाने के लिए जन्नत तक का सफर अकेले ही करना है – हा उसने उसे साधारण रूप से बस पाने की चाह रखी – वह जाता गया हा मुझे आज भी याद है की  वह उसे मिल भी गई , उसकी आवाज उस युवक ने सुनी भी थी पर जीजस ने  कहा की तुम उसे देखे बिना आगे चलते जाओ वह तुम्हें चाहती है पर तुम उसे बिना मिले जहन्नुम या जन्नत के दरवाजे पर जा सकते हो – तब वह बिना पीछे मुड़े आगे चला गया ओर ये भी नहीं पूछा की वह उसे मिलेगी भी या नहीं ओर जहन्नुम के दरवाजे पर चला गया उसे अपने अंजाम की कोई परवाह नहीं थी उसेपता था की वह युवती जन्नत जाएगी इतना याद रखा की केवल 3 लाइक उसकी ज़िंदगी बदल सकती है या मौत दिला सकती है रास्ता साफ था या कांटे फिर भी अंदर चला गया उसे जीवन का लॉं थोड़े ही पता था पर उसे यह एहसास था की न्यू  लाइफ दोनों की ज़िंदगी बादल या यू कहे की ज़िंदगी सफल बना सकती है ||

# quki manjil sabke liye bani hai #

# Us raste se gujar jana apne hatho m hai #

//पापी लोक की घटनायें//

//पापी लोक की घटनायें//

वास्‍तविक रूप मे जीवन का घटना चकृ अलग-अलग स्‍वरूपों मे चलता आ रहा है घटनाये बनती है और समाप्‍त भी हो जाती है विघमान घटनाये नवीन घटनाओं का आह़वान करती है यही तो होता है संसार अर्थात पापी लोक मे, जिसे किसी ग्रंथ मे मृत्‍यु लोक की संज्ञा दी गई है। यह पहले से संज्ञान मे आता है, पापी लोक का मतलब जिस स्‍थान पर क्षण-क्षण मे पाप की बारिश रूपी घटनाये कारित होती है यह पाप मानव, के साथ-साथ उस मृत्‍यु लोक मे निवास करने वाले प्रत्‍येक जीव के द्वारा किया जाता है जग जाहिर है।

 ** मेरी सोच **

• केवल मुझे वह रास्ता चाहिए जिस पर चलकर इंसान के अलावा केवल आत्मा जाती है। • मै केवल उसी की लालसा लगाये कार्यरत हॅू जो मुझे बिल्कुल प्रयोग नही करना चाहते/चाहती *** • विघमान परिस्थितियो का सामना करना मेरा कर्तव्य है और बाकियों को तो मैं नही जानता। • चोर बहुत शातिर होते है चोरी करने की तरकीब चुराते है मैं तो केवल अपनों के सोच ही चुराता हॅू । • चांदनी और चांद के कितने कथन विघमान है दिमांग और किताबों मे छपे है,  शायरो के मस्तिष्क मे मेरी संपत्ति तो वही है सदा-सदा के लिए। *** • मानते क्यू  नही मेरी बात —- मैं गलत तो नही हॉ हो गलत तो जवाब कह देना मुझे स्वीकार है। • केवल आपके कथन के अनुसार * दुनिया बहुत बड़ी है, कही भी कोशिश करो सफलता मिल ही जायेगी। • मेरा कथन है कि 100 बार एक ही प्रश्न हल करूंगा चाहे वह हर बार सही हो पर #परीक्षक  गलत करते हो तो मैं क्या करूं । • तकलीफ मुझे भी है उसे भी है पर प्यार मुझे भी है उसका पता नही । WIN_20170326_11_06_52_Pro.jpg

call का महत्‍व

27/02/2017 समय 8:32 सायंकाल

** फोन या काल को सोच कर उठाना या फिर लगाना इसके महत्‍व/समझ**

क्‍या किसी के फोन कॉल को रिसीव करना पाप या धमण्‍ड है। ऐसा तो नही कि मोबाईल रखना मेरे लिए केवल पाप ही है, हॉ अगर पाप है तो मेरा नम्‍बर कभी पिक अप मत करना। हॉ आपकी सोच मुझसे कही बेहतर है या किसी गलत कार्य के लिए आपको बुलाया जा रहा या मैं खुद ही गलत हू ऐसा मेरा मानना है पर किसी ऐसे व्‍यक्ति से मैं संपर्क कर रहा हू  जिसके पास अगर साधारण या पुराना या बिल्‍कुल भी नही काम करने योग्‍य सेल फोन है तो  भी  वह व्‍यक्ति कॉल  पिक आप क्‍यू नही करते ये मै अवश्‍य कहना चाहूंगा उस की तरह  नही कि किसी अनजान नम्‍बर  से आपके पास सम्‍पर्क हो रहा है वे सब आपको जानते है और यह तक दुर्व्‍यवहार करने की जिज्ञासा तो दूर कभी अपशब्‍दो को उपयोग भी नही करते अगर आप उन  बेकार युवक को जान  रहे हो  ओर वह आपको लगातार  गाली गलौचा या परेशान कर रहे हो तो मत उठाईये फोन पर हम तो आपको know  करते है  बिना किसी  कार्य या तो बिना  मतलब  के काल करे तो कहो सत्‍य  मेरा  लक्ष्‍य ही नहीं  but  अगर पागल पन मे आ जाये तो उसकी कोई नही पर  यार  कॉल  तो पिक  अप  कीजिए  यह कथन  दोनो ओर  प्रसारित  होता है पर सज्‍जन  ये बात कहा समझने वाले  है उनको  किसी दूसरी परी का तो फोन  आ नही रहा पर भी बात क्‍या है यह तो समझ ले ?

To be cont…

आश्रम क्‍या है?

एक साधारण जीवन अत्‍यंत क‍ठिन होता है जो बालपन से अपने जीवन का आरंभ करता है और किशोरावस्‍था मे एक तो कईयो को अपना लक्ष्‍य तक पता नही होता वह अपना जीवन-यापन माता-पिता और पूर्वजो के साथ मौज करते हुए जीवन का वह पहलू को समाप्‍त करने को तैयार रहते है  जिसने वह अभी है लेकिन बाद  का भविष्‍य उन्‍हे कभी भी ज्ञात नही होता है हर कोई यह तरकीब लगाता है कि आने वाले 10-15 सालों से पहले मैं स्‍वंय ही अपने पैरो पे खडा होकर घर परिवार मे सबकी सहायता करूंगा।और इसके साथ सबका भरण-पोषण भी करूंगा। यह गाथा उस असामान्‍य से बालक की है जो कि सेाचता जब है तब तक बालकपन मे होता है लेकिन जैसे ही उसने किशोर अवस्‍था के चरण बद्ध क्रम मे अपने कदम रखता है तो उसकी लालसायें बढती ही जाती है कोई भी सामान्‍य युवक/युवती अगर अपने इस अवस्‍थाओं को जानकार समझ गये तो ठीक है नही तो वे विमार्ग मे जाने के लिए अग्रेसित हो जाते है मगर मे किसी अच्‍छे  से व्‍यक्ति के सम्‍पर्क मे आ गये तो महान विद्वान बन जायेगें या तो फिर दुर्गति या दुमार्ग पर जाने लगेगें मेरा मानना है कि माता-पिता उनके सतमार्ग या दुमार्ग  पर जोने के लिए बेहद ही महत्‍वपूर्ण है उनके कहे अनुसार आप चले तो ठीक अन्‍यथा राख बन जायेगें तभी मुझे भी एक पहेली चाद आ गई “a useless ash” or “some handful  ash” दोनो मे फर्क कुछ नही है केवल राख ही हाथ आयेगी।

मै इस पागलपन टाईप के फिल्‍म लेख को लिखता हॅू  किसी को शायद यह नापसंद हो पर एक कथन के उपर यह एक लेख जो मैने लिखा है एक हमसाथ या यू कहो कि मै मजाक मे मेरे  साले साहब ने यह कर दिये थे उसका किसी या कोई संदेह नही कि वास्‍तव मे वे हमारे सालेसाहब जी है लेकिन उनका कथन  मैने सुनातो मे दंग रह गया कि इस तरह की बात या ऐसे शब्‍दो को वह कह देगा उसका कथन शायद उसी के ही हो या फिर किसी और के यह किसी के अपमान  मे प्रस्‍तुत शब्‍द नही है —कथन** जीजा तुमने जीजी** को फिल्‍मी टाईप से क्‍यों प्रपोज किया वह इन सब चीजों मे बिलीव नही करती या यूं कहे कि उसे फिल्‍मी टाईप लडके पसंद नही है** ये बात सुनकर मैं दंग रह गया और अनायास ही केवल आपका मुखडा सामने प्रदर्शित हो गया और उस चुप रह बोला व स्‍वंय मै उदास हो गया ।

ये सब बाते अब मुझे बेकार सी लगने लगी क्‍या कोई प्‍यार सेक्‍स के लिए करता है नही न लेखक का कहना है कि वह के स्‍वच्‍छ प्रेम ही चाहता था अन्‍यथा और कुछ नही उसकी याद के कुछ पहलू  प्रमाण करना चाहिए केवल एक बार उसका हाथ पकड लिया तो मुझे अनंत पाप लग गया मै भगवान टाईप मे विश्‍वास नही करता पर पाप पुण्‍य ये हो सकता है मानकर अन्‍य रूप मे विश्‍वास करने लगा जैसे लगाव प्रेम सनमार्ग से दुनिया दुषित है या वहा पर निवास करने वाले मानव या जीव है जो किसी बात पर विश्‍वास नही करते—

उसके बाद आता है गृहस्‍थ अवस्‍था जिसमे प्रवेश होने की मेरी उम्र तकरीबन हो गई है मेरे साथ के कई मित्र उस अवस्‍था मे प्रवेश कर चुके है मतलब की ये स‍भी इसका आनंद प्राप्‍त कर रहे है एवं स्‍वच्‍छ जीवन यापन कर रहे है इस सब बातो से अनभिग्‍य हॅू  अब मात्र एक वर्ष बाद मै वानप्रस्‍थ आश्रम मे प्रवेशकरने जा रहा हॅू जिसका मतलब के वन मे प्रवेश करना या सामान्‍य जीवन यापन करनी है किसी तरह का कोई भोग विलास या कुछ ओर जो सामान्‍य मानवों के द्वारा किया जाता है मै प्रेमपर विश्‍वास करता हॅू पुर्नजन्‍म को भी परन्‍तु आत्‍मा सत्‍य है यह भी जानता हू अब मेरेमन मे कोई मोह नही रहा विवाह एवं प्रेमिका सब समाप्ति के प्रथम स्‍तर पर है रास्‍ता साफ है ओह आप से नही कहा ये ही मेरा रास्‍ता है यदि इस मृत्‍युलोक  मे ऐसे ही रहा तो जीवन का कोई मूल्‍य ही नही रह जायेगा। अगले वर्ष जनवरी से मै या मेरा शरीर विधमान परिस्‍थतियों को भूल जायेगा और बन की ओर प्रस्‍थान कर जायेगे या किसी एकांत स्‍थान या हो सके भगवान पर विश्‍वास कर सेवासदन समिति बनाकर कार्य करूं या किसी बडे शहर के पास के पूजा स्‍थल पर सेवा हॅू यही का समय तक जीवन रहा तो सन्‍यास अवस्‍था मे भी जाना है।

** लेख – लिखना आसान है- निभाना कठिन है **

उसने कहा**

आश्रम क्‍या है?

एक साधारण जीवन अत्‍यंत क‍ठिन होता है जो बालपन से अपने जीवन का आरंभ करता है और किशोरावस्‍था मे एक तो कईयो को अपना लक्ष्‍य तक पता नही होता वह अपना जीवन-यापन माता-पिता और पूर्वजो के साथ मौज करते हुए जीवन का वह पहलू को समाप्‍त करने को तैयार रहते है  जिसने वह अभी है लेकिन बाद  का भविष्‍य उन्‍हे कभी भी ज्ञात नही होता है हर कोई यह तरकीब लगाता है कि आने वाले 10-15 सालों से पहले मैं स्‍वंय ही अपने पैरो पे खडा होकर घर परिवार मे सबकी सहायता करूंगा।और इसके साथ सबका भरण-पोषण भी करूंगा। यह गाथा उस असामान्‍य से बालक की है जो कि सेाचता जब है तब तक बालकपन मे होता है लेकिन जैसे ही उसने किशोर अवस्‍था के चरण बद्ध क्रम मे अपने कदम रखता है तो उसकी लालसायें बढती ही जाती है कोई भी सामान्‍य युवक/युवती अगर अपने इस अवस्‍थाओं को जानकार समझ गये तो ठीक है नही तो वे विमार्ग मे जाने के लिए अग्रेसित हो जाते है मगर मे किसी अच्‍छे  से व्‍यक्ति के सम्‍पर्क मे आ गये तो महान विद्वान बन जायेगें या तो फिर दुर्गति या दुमार्ग पर जाने लगेगें मेरा मानना है कि माता-पिता उनके सतमार्ग या दुमार्ग  पर जोने के लिए बेहद ही महत्‍वपूर्ण है उनके कहे अनुसार आप चले तो ठीक अन्‍यथा राख बन जायेगें तभी मुझे भी एक पहेली चाद आ गई “a useless ash” or “some handful  ash” दोनो मे फर्क कुछ नही है केवल राख ही हाथ आयेगी।

मै इस पागलपन टाईप के फिल्‍म लेख को लिखता हॅू  किसी को शायद यह नापसंद हो पर एक कथन के उपर यह एक लेख जो मैने लिखा है एक हमसाथ या यू कहो कि मै मजाक मे मेरे  साले साहब ने यह कर दिये थे उसका किसी या कोई संदेह नही कि वास्‍तव मे वे हमारे सालेसाहब जी है लेकिन उनका कथन  मैने सुनातो मे दंग रह गया कि इस तरह की बात या ऐसे शब्‍दो को वह कह देगा उसका कथन शायद उसी के ही हो या फिर किसी और के यह किसी के अपमान  मे प्रस्‍तुत शब्‍द नही है —कथन** जीजा तुमने जीजी** को फिल्‍मी टाईप से क्‍यों प्रपोज किया वह इन सब चीजों मे बिलीव नही करती या यूं कहे कि उसे फिल्‍मी टाईप लडके पसंद नही है** ये बात सुनकर मैं दंग रह गया और अनायास ही केवल आपका मुखडा सामने प्रदर्शित हो गया और उस चुप रह बोला व स्‍वंय मै उदास हो गया ।

ये सब बाते अब मुझे बेकार सी लगने लगी क्‍या कोई प्‍यार सेक्‍स के लिए करता है नही न लेखक का कहना है कि वह के स्‍वच्‍छ प्रेम ही चाहता था अन्‍यथा और कुछ नही उसकी याद के कुछ पहलू  प्रमाण करना चाहिए केवल एक बार उसका हाथ पकड लिया तो मुझे अनंत पाप लग गया मै भगवान टाईप मे विश्‍वास नही करता पर पाप पुण्‍य ये हो सकता है मानकर अन्‍य रूप मे विश्‍वास करने लगा जैसे लगाव प्रेम सनमार्ग से दुनिया दुषित है या वहा पर निवास करने वाले मानव या जीव है जो किसी बात पर विश्‍वास नही करते—

उसके बाद आता है गृहस्‍थ अवस्‍था जिसमे प्रवेश होने की मेरी उम्र तकरीबन हो गई है मेरे साथ के कई मित्र उस अवस्‍था मे प्रवेश कर चुके है मतलब की ये स‍भी इसका आनंद प्राप्‍त कर रहे है एवं स्‍वच्‍छ जीवन यापन कर रहे है इस सब बातो से अनभिग्‍य हॅू  अब मात्र एक वर्ष बाद मै वानप्रस्‍थ आश्रम मे प्रवेशकरने जा रहा हॅू जिसका मतलब के वन मे प्रवेश करना या सामान्‍य जीवन यापन करनी है किसी तरह का कोई भोग विलास या कुछ ओर जो सामान्‍य मानवों के द्वारा किया जाता है मै प्रेमपर विश्‍वास करता हॅू पुर्नजन्‍म को भी परन्‍तु आत्‍मा सत्‍य है यह भी जानता हू अब मेरेमन मे कोई मोह नही रहा विवाह एवं प्रेमिका सब समाप्ति के प्रथम स्‍तर पर है रास्‍ता साफ है ओह आप से नही कहा ये ही मेरा रास्‍ता है यदि इस मृत्‍युलोक  मे ऐसे ही रहा तो जीवन का कोई मूल्‍य ही नही रह जायेगा। अगले वर्ष जनवरी से मै या मेरा शरीर विधमान परिस्‍थतियों को भूल जायेगा और बन की ओर प्रस्‍थान कर जायेगे या किसी एकांत स्‍थान या हो सके भगवान पर विश्‍वास कर सेवासदन समिति बनाकर कार्य करूं या किसी बडे शहर के पास के पूजा स्‍थल पर सेवा हॅू यही का समय तक जीवन रहा तो सन्‍यास अवस्‍था मे भी जाना है।

** लेख – लिखना आसान है- निभाना कठिन है **

उसने कहा**

// वर्तमान से भूतकाल का सफर //

वर्तमान से भूतकाल का सफर

जो समा आज है वह गुजरा हुआ कल भी था वे यादे आज भी है जो गुजरा हुआ कल था समय गुजर गया बस यादे रह गई है बचपन का दिन था जिसमे स्‍कूल जाने का डर और होमवर्क की चिंता लेट स्‍कूल गये तो सजा फिर भी मजा आया करता था मित्र आज भी है और गुजरे समय मे भी थे पहले प्‍यार से मिलते और बाते किया करते थे आज तेज रफतार से निकल जाते बाते करता तो दूर मुसकुराते भी नही क्‍या ऐसा भी क्‍या हो गया कि एक सहपाठी मित्र दूसरे से बात तक नही कर सकते शायद  उनके दिमांग  मे बडे छोटे या गरीबी या अमीरी का दरवाजा लगा है वे अपने मित्र दूसरो को नही बनाना चाहते खैर ये सब बाते तो चली गई पर अभी भी समय का सफर चल रहा है मित्रो मिल न सको गर कोई बात नही प्‍यारो राह चलते दिखें तो मुशकुरा जरूर देना। दिल को अच्‍छा लगेगा मन मे अनंत अनंत उमंग जाग जायेगी की ये देखो मेरा मित्र जा रहा है कितनी तरक्‍की कर रहा है। और सच्‍चाई का सामना करने से कोई छोटा या बडा नही होता ओर न ही अमीर या गरीब होता है वे तो अपनी राह पर चल रहे है बस एक सहमा हुआ दिल कुछ करने की आस से जाग जायेगा।

मेरे सभी मित्रो को अनंत तरक्‍की के लिए अमिट प्‍यार —** umee **