आश्रम क्‍या है?

एक साधारण जीवन अत्‍यंत क‍ठिन होता है जो बालपन से अपने जीवन का आरंभ करता है और किशोरावस्‍था मे एक तो कईयो को अपना लक्ष्‍य तक पता नही होता वह अपना जीवन-यापन माता-पिता और पूर्वजो के साथ मौज करते हुए जीवन का वह पहलू को समाप्‍त करने को तैयार रहते है  जिसने वह अभी है लेकिन बाद  का भविष्‍य उन्‍हे कभी भी ज्ञात नही होता है हर कोई यह तरकीब लगाता है कि आने वाले 10-15 सालों से पहले मैं स्‍वंय ही अपने पैरो पे खडा होकर घर परिवार मे सबकी सहायता करूंगा।और इसके साथ सबका भरण-पोषण भी करूंगा। यह गाथा उस असामान्‍य से बालक की है जो कि सेाचता जब है तब तक बालकपन मे होता है लेकिन जैसे ही उसने किशोर अवस्‍था के चरण बद्ध क्रम मे अपने कदम रखता है तो उसकी लालसायें बढती ही जाती है कोई भी सामान्‍य युवक/युवती अगर अपने इस अवस्‍थाओं को जानकार समझ गये तो ठीक है नही तो वे विमार्ग मे जाने के लिए अग्रेसित हो जाते है मगर मे किसी अच्‍छे  से व्‍यक्ति के सम्‍पर्क मे आ गये तो महान विद्वान बन जायेगें या तो फिर दुर्गति या दुमार्ग पर जाने लगेगें मेरा मानना है कि माता-पिता उनके सतमार्ग या दुमार्ग  पर जोने के लिए बेहद ही महत्‍वपूर्ण है उनके कहे अनुसार आप चले तो ठीक अन्‍यथा राख बन जायेगें तभी मुझे भी एक पहेली चाद आ गई “a useless ash” or “some handful  ash” दोनो मे फर्क कुछ नही है केवल राख ही हाथ आयेगी।

मै इस पागलपन टाईप के फिल्‍म लेख को लिखता हॅू  किसी को शायद यह नापसंद हो पर एक कथन के उपर यह एक लेख जो मैने लिखा है एक हमसाथ या यू कहो कि मै मजाक मे मेरे  साले साहब ने यह कर दिये थे उसका किसी या कोई संदेह नही कि वास्‍तव मे वे हमारे सालेसाहब जी है लेकिन उनका कथन  मैने सुनातो मे दंग रह गया कि इस तरह की बात या ऐसे शब्‍दो को वह कह देगा उसका कथन शायद उसी के ही हो या फिर किसी और के यह किसी के अपमान  मे प्रस्‍तुत शब्‍द नही है —कथन** जीजा तुमने जीजी** को फिल्‍मी टाईप से क्‍यों प्रपोज किया वह इन सब चीजों मे बिलीव नही करती या यूं कहे कि उसे फिल्‍मी टाईप लडके पसंद नही है** ये बात सुनकर मैं दंग रह गया और अनायास ही केवल आपका मुखडा सामने प्रदर्शित हो गया और उस चुप रह बोला व स्‍वंय मै उदास हो गया ।

ये सब बाते अब मुझे बेकार सी लगने लगी क्‍या कोई प्‍यार सेक्‍स के लिए करता है नही न लेखक का कहना है कि वह के स्‍वच्‍छ प्रेम ही चाहता था अन्‍यथा और कुछ नही उसकी याद के कुछ पहलू  प्रमाण करना चाहिए केवल एक बार उसका हाथ पकड लिया तो मुझे अनंत पाप लग गया मै भगवान टाईप मे विश्‍वास नही करता पर पाप पुण्‍य ये हो सकता है मानकर अन्‍य रूप मे विश्‍वास करने लगा जैसे लगाव प्रेम सनमार्ग से दुनिया दुषित है या वहा पर निवास करने वाले मानव या जीव है जो किसी बात पर विश्‍वास नही करते—

उसके बाद आता है गृहस्‍थ अवस्‍था जिसमे प्रवेश होने की मेरी उम्र तकरीबन हो गई है मेरे साथ के कई मित्र उस अवस्‍था मे प्रवेश कर चुके है मतलब की ये स‍भी इसका आनंद प्राप्‍त कर रहे है एवं स्‍वच्‍छ जीवन यापन कर रहे है इस सब बातो से अनभिग्‍य हॅू  अब मात्र एक वर्ष बाद मै वानप्रस्‍थ आश्रम मे प्रवेशकरने जा रहा हॅू जिसका मतलब के वन मे प्रवेश करना या सामान्‍य जीवन यापन करनी है किसी तरह का कोई भोग विलास या कुछ ओर जो सामान्‍य मानवों के द्वारा किया जाता है मै प्रेमपर विश्‍वास करता हॅू पुर्नजन्‍म को भी परन्‍तु आत्‍मा सत्‍य है यह भी जानता हू अब मेरेमन मे कोई मोह नही रहा विवाह एवं प्रेमिका सब समाप्ति के प्रथम स्‍तर पर है रास्‍ता साफ है ओह आप से नही कहा ये ही मेरा रास्‍ता है यदि इस मृत्‍युलोक  मे ऐसे ही रहा तो जीवन का कोई मूल्‍य ही नही रह जायेगा। अगले वर्ष जनवरी से मै या मेरा शरीर विधमान परिस्‍थतियों को भूल जायेगा और बन की ओर प्रस्‍थान कर जायेगे या किसी एकांत स्‍थान या हो सके भगवान पर विश्‍वास कर सेवासदन समिति बनाकर कार्य करूं या किसी बडे शहर के पास के पूजा स्‍थल पर सेवा हॅू यही का समय तक जीवन रहा तो सन्‍यास अवस्‍था मे भी जाना है।

** लेख – लिखना आसान है- निभाना कठिन है **

उसने कहा**

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