कबीट का पेड

साल २०१६ की बात है एक गांव था जिसका नाम खजरी था वही पर पोस्‍ट आफिस भी था उसके नजदीक मे एक आश्रम था जिसमे बहुत सारे पेड लगे हुए थे आम, जामुन के पेड लहलहा रहे थे उसमे पेडो की घनघनाते हुए आवाज आती थी तेज हवाये चल रही थी पेडो से आहम टूट कर गिर रहे थे बच्‍चे उन पेडो के नीचे खडे होकर जल्‍दी जल्‍दी आम अपने अपने लिए उठा रहे थे वे चाहते थे कि उन्‍हे ज्‍यादा से ज्‍यादा आम मिल जाये शाम होन को थी सब बच्‍चे अपने घर जा रहे है उनमे से दो बच्‍चे मेरी तरु आये और मुझे कहा कि आप इतनी रात तक यहा क्‍यो रूके हुए हो मैने उस समय उन्‍हे कुछ नही बताया और उन्‍हे कहा कि अभी थोडी देर बाद जा रहा हॅू तुम भी जल्‍दी घर जाओ वे सब चले गये मे वही बैठा एक चबूतरे को देखता रहा उसमे पहले एक बडा पेड हुआ करता था जिस पर बडे बडे फल लगते थे यह एक जंगली फल लगते थे उस पेड का नाम कबीट का पेड जिस पर बडे बडे फल लगते थे यह एक जंगली फल का पेड था जिसका स्‍वाद खटटा मीठा होता है खैर अब पेड काट दिया गया है पहले पहले सुनने मे आता था कि उस पेड पर भूत प्रेत का साया है उसमे भूत प्रेत रहते थे इसी बात के चलत सायद पेड काट दिया गया है हॉ याद आया उस‍के पास ही एक पेड था जिस पर जामुन भी लगते थे और एक पूराने समय का कुआ भी था जिसमे झाडी लगी हुई थी तथा यह कुआ छोटा तथा भ्यानक था पहले उस कुएं से पानी भरने महिलाये आया करती थी एक बार उसमे एक लडकी गिर गई और वह मर गई तब वहा कोई पानी भरने नही आता था वह कुआ बडा ही मनहूस माना जाता था अब धीरे धीरे वह कुआ जर्जर हो गया ओर काई जमने लगी थी । वहा अब कोई नही जाता था अब वहा पर दो भूतिया चीजे हो गई है एक ओर पुरानी बात जहा आप एक छींद का पेड था वह भी मनहूस था उस पर जो भी चडता था उसका कुछ न कुछ बुरा हुआ ही हुआ है अब साम ज्‍यादा हो रही मुझे भी घर जाना चाहिए ये इस तरह की बाते, बाद मे भी सुनने को मिलेगी ।
आगे है————–

ताबूत मे बंद आत्‍मा

हाल ही की बात है छिंदवाडा शहर का एक गांव था जिसका नाम खजरी है उसमे एक लडका रहता था जिसका नाम उमेश अण्‍डा था वह बहुत ही अच्‍छे काम मे सभी को अपने साथ लेता था बुरी संगत मे पडने से पूर्व वह बच्‍चो को टयूशन भी दिया करता था व‍ह बिना किसी शुल्‍क के हा कभी किसी के पेरेन्‍ट मुझे 300-400 रू दे दिया करते तो वह उनके बच्‍चो के लिए ही वह राशि खर्च्‍ कर दिया करता था कभी बच्‍चो के लिए अपने घर मे पोहा बनवाया करता था वउनके लिए कुछ टाफी या कभी कभी केक भी लाया करता था उमेश ने करीबन 4 साल तक बच्‍चो को बढाया वे सभी आगे की कक्षा मे चले गये, वह सभी बच्‍चो से बहुत प्‍यार करता था किसी को मारता तो धीरे से अगर वह रोने लगे तो उसे गले लगाकर माफ भी कर देता था सभी बच्‍चे उससे बेहद प्‍यार करते थे।
उमेश एक किराये के मकान मे रहता था उसके मकान मालिक शराब का विक्रय करते थे पर बच्‍चो को उसके बारे मे अच्‍छी शिक्षा वह हमेशा ही दिया करता था कि शराब बहुत बुरी चीज है बच्‍चे उमेश से बहुत खुश रहतेथे क्‍योकि वह उनके परीक्षा के समय अच्‍छी तैयारी करवा देता था एक दिन की बात है उसे किसी ने बताया कि निधि उसके घर की तरफ आ रही है वह परेशान हो गया और सभी को जल्‍दी छुटटी दे दी करीबन 9:30 से 10:00 के बीच समय रहा होगा उस समय निधि उसकी सहेली के साथ मेरे घर पर आई उसकी सहेली के पिता को वह अंकल कहा करता था इसलिए उसे घर बुला लिया पर निधि से कुछ नही कहा वह अपनी सहेली को चलने के लिए कहने लगी पर उमेश की बहन ने उसे रोक लिया उसे एक कापी चाहिए थी जो ** की थी वह लेकरजाने लगी तब उमेश ने उसे राककर कहा कि हमारे घर आये हो तो चाय पीकर जाओ पर वे जाने लगी अब उस समय उमेश को निधि को माफ कर देना चाहिए वह दोडकर उसके पास गया ओर उसे रास्‍ते पर ही रोकने की कोशिश करने लगा और कहा कि तुमे मेरे साथ ऐसा व्‍यवहार क्‍यू कर रही हो पर निधि कुछ न बोली ओर आगे निकल गई।
उसके बाद बहुत साल तक उमेश निधि से बात करनेकी कोशिश करता रहा पर बात नही हो पाई 2014 मे उसने मोबाईल लिया ओर वॉटस्‍अप पर निधि से बात की पर उसने साफ मन किया कि वह उससे लव टाईप कोई बात नही करना चाहती, इस वजह से ही उमेश ने शराब पीना शुरू कर दिया जिसके घर के पास शराब मिलती थी पर वह न पी सका पर पर दगा मिलने पर पी लिया। ओर उसने अपना मोबाईल नर्मदा नदी मे फैक दिया उसके बाद उसने अभी तक निधि से बात नही कि वह अब योगा के माध्‍यम से बात करने की कोशिश कर रहा है पर निधि शायद योगा नही जानती है तो सुबह ही उससे संपर्क हो जाता। इसी बीच उसके 32 साल पूरे होने को है ओर उमेश की मृत्‍यु का समय निकट आ गया, उसकी भविष्‍यवाणी थी कि 2 साल पूरे होने पर ही उसकी मृत्‍यु किसी कारण हो ही जायेगी ।
1 जनवरी के दिन उमेश सुबह योगा कर रह था उसके हदय की धडकन तेज हुई और रूक गई वह मर गया उससेपहले उसने अपनेमित्र रघु से कह दिया था कि वह उसके मरने के बाद उसके शरीर को 11 वे दिन निकाल ले वो भी 12:00 बजे से पहले – उमेश मर गया उसकी इच्‍छा थी की निधि उसे अंतिम समय मे देखेउमेश चाहता था कि उसकी शरीर को ताबुत मे बंद कर‍ क्रिश्चियन रिवाज से दफनाया जाये उमेश की देह को 2 जनवरी 2017 को दफनाने ले जाया जा रहा था निधि के घर के पास से लाश ले जाता हुआ विशाल जनसमूह निधि ने देखा तो निधि ने भी निकलकर देखा पर उसे कुछ महसूस नही हुआ वह आनंद से पूछ रही थी कि किसकी मृत्‍यु हो गई है आनंद अपने आशू रोक न सका बोला उमेश था मर गया अब सिसेमे लिपटकर बाते करूगा ऐसा निधि से कहा ओर घर आ गया।
इसके बाद 11 वे दिन रघु उमेश को निकालने आने वाला था उसको पता था कि उमेश 11 दिन तक अपनी सांसे थाम लेगा ओर रात को उसे मे निकाल लूंगा।
पर रधु भूल गया ओर लाश निकालने नही गया रात खत्‍म हुई ओर अगला दिन लग गया अत तो सच मे उमेश की मौत हो गई वह अब मर गया था अब उसकी आत्‍मा हमेशा के लिए ताबूत मे बंद हो गई। यह बंदी थी न परम पिता परमेश्‍वर की तो ठीक है मरने दो सभी प्रेम करने वाले एक तरफ लब निभाने वाले को एसा लगा मरने के बाद उमेश को —-????
अगला जन्‍म 2018 मे होगा केवल उसी घर मे —–????
कोई बता पायेगा कहा–?
किसके घर मे –?
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Cont………………